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शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

"COPY TOOL"





 दोस्तों आज कॉपी -पेस्ट  से कोई भी अनजान नही है ,  अगरyd3ztxJOSRev0DCKFsghQ; __utma=150635877.1587628290.1341989135.1343374999.1343381270.17; __utmb=150635877.10.10.1343381270; __utmc=150635877; __utmz=150635877.1343374999.16.15.utmcsr=hindsex.blogspot.in|utmccn=(referral)|utmcmd=referral|utmcct=/2011/04/blog-post_4984.html; blogger_SID=DQAAAL8AAACbWiw4n-QYiAeVIPYXfKynZL3srt8bMNjYPFRAtAJ0nJzKZbupjmaho3ZMTakuX4FwbRHrPDCLLVntQ244lMQOPIH4ynMLWVyn9PSwzfIIGeapstI6AANC-D3Ub-JONTQ-mDfqhNysbHVZQjKWE-WhS3GWTXY7Sg9gC2d7VpmQoVuvvTUuWiAt  यहाँ तक तो बात ठीक है पर जब फाइल का साईज 1 GBया उससे  अधिक की है तो हमें खासा परेशानी होती है  फिर करते रहो इंतजार .....
 फिर कौन नही चाहता उसके कंप्यूटर की copy-paste स्पीड बढ़ जाए ???

 दोस्तों आपकी इसी समस्या का हल है -TERA COPY PRO
 इससे आपके कॉपी करने की स्पीड बढ़ जाती है ..

इस मजेदार सॉफ्टवेर को डाउनलोड करने के लिए  यहाँ क्लिक करे | 
दोस्तों कमेन्ट करना न भूले ......

"Typing tool"

दोस्तों अब टाइपिंग के स्पीड  लिए आपको कही जाने की जरुरत नही . आप घर बैठे ही  अपनी स्पीड बढ़ा सकते है और  टाइपिंग सीख सकते है .और साथ -ही -साथ अपनी स्पीड भी बढा सकते है.

वैसे तो नेट में बहुत से टाइपिंग मास्टर उपलब्ध है पर वो ट्रायल वर्जन  में होते है पर मै आज  आपको  फुल वर्जन  दे रहा हू जिसे आप  यहाँ क्लिक करके डाउनलोड कर सकते है | ये सॉफ्टवेर पोर्टब्ले है  इसे इंस्टाल करने की जरुरत नही बस आईकॉन पे डबल क्लीक करने से ओपन हो जाएगा .


डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें.

दोस्तों कमेन्ट करना ना भूले ..

गुरुवार, 26 जुलाई 2012

"मोहब्बत का एहसास "



'मोहब्बत रूह की खुराक है। यह वह अमृतबूँद है, जो मरे हुए भावों को जिन्दा करती है। यह जिन्दगी की सबसे पाक, सबसे ऊँची, सबसे मुबारक बरकत है।' -मुंशी प्रेमचंद

मोहब्बत एक एहसास है, जिसे रूह से महसूस किया जा सकता है। यह उस अनादि अनंत ईश्वर की तरह है, जो सृष्टि के कण-कण में विद्यमान है। प्यार, जो हमारे संपूर्ण जीवन में विभिन्न रूपों में सामने आता है। जो यह एहसास दिलाता है कि जिन्दगी कितनी खूबसूरत है। डॉ. महावीरप्रसाद द्विवेदी ने 'प्रेम' की व्याख्या कुछ इस तरह की है कि - 'प्रेम से जीवन को अलौकिक सौंदर्य प्राप्त होता है। प्रेम से जीवन पवित्र और सार्थक हो जाता है। प्रेम जीवन की संपूर्णता है।' सृष्टि में जो कुछ सुकून भरा है, प्रेम है। प्रेम ही है, जो संबंधों को जीवित रखता है। परिवार के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी सिखाता है।

प्रेम इंसान को विनम्र बना देता है। रूखे से रूखे और क्रूर से क्रूर इंसान के मन में यदि किसी के प्रति प्रेम की भावना जन्म ले लेती है, तो संपूर्ण प्राणी जगत के लिए वह विनम्र हो जाता है। ऐसे कई उदाहरण हमारे ग्रंथों में मिलते हैं। प्रेम चाहे व्यक्ति विशेष के प्रति हो या ईश्वर के प्रति। आश्चर्यजनक रूप से उसकी सोच, उसका व्यवहार, उसकी वाणी सबकुछ परिवर्तित हो जाता है।

प्यार, जिन्दगी का सबसे हसीन जज्बा है। बोलने में यह जितना मीठा है, उसका एहसास उतना ही खूबसूरत और प्यारा है। प्यार के एहसास को शब्दों में नहीं बाँधा जा सकता। उसे व्यक्त करने की आवश्यकता भी नहीं होती। व्यक्ति की आँखें, चेहरा, हाव-भाव यहाँ तक कि उसकी साँसें दिल का सब भेद खोल देती हैं। प्रेम की अनोखी दुनिया में खोकर कोई बाहर आना ही नहीं चाहता। वह जिसे प्यार करता है, खुली आँखों से भी उसी के सपने देखता है। उसके साथ बिताई घड़ियों को बार-बार याद करता है। उसके लिए सजना-सँवरना चाहता है। यही नहीं, औरों से बात करते हुए भी उसी का जिक्र चाहता है। यही प्यार का दीवानापन है और इस दीवानेपन में जो आनंद है, वह संसार की किसी भौतिकता में नहीं है।

आज की तेज रफ्तार से दौड़ती जिन्दगी में व्यक्ति जब एक-दूसरे को पीछे धकेलते हुए आगे बढ़ने की होड़ में संवेदनाओं को खोता चला जा रहा है, रिश्तों और एहसासों से दूर, संपन्नता में क्षणिक सुख खोजने के प्रयास में लगा रहता है, ऐसी स्थिति में जहाँ प्यार बैंक-बैलेंस और स्थायित्व देखकर किया जाता है, वहाँ सच्ची मोहब्बत, पहली नजर का प्यार और प्यार में पागलपन जैसी बातें बेमानी लगती हैं परंतु प्रेम शाश्वत है। प्रेम सोच-समझकर की जाने वाली चीज नहीं है। कोई कितना भी सोचे, यदि उसे सच्चा प्रेम हो गया तो उसके लिए दुनिया की हर चीज गौण हो जाती है। प्रेम की अनुभूति विलक्षण है। प्यार कब हो जाता है, पता ही नहीं चलता। इसका एहसास तो तब होता है, जब मन सदैव किसी का सामीप्य चाहने लगता है। उसकी मुस्कुराहट पर खिल उठता है। उसके दर्द से तड़पने लगता है। उस पर सर्वस्व समर्पित करना चाहता है, बिना किसी प्रतिदान की आशा के।


प्रेम हृदय का निश्छल व्यापार है। सर्वात्म भाव से किसी को आत्मसमर्पण कर देने में असीम सुख प्राप्त होता है। जयशंकर प्रसाद ने कहा है कि 'प्रेम चतुर मनुष्यों के लिए नहीं है। वह तो शिशु-से सरल हृदय की वस्तु है।' सच्चा प्रेम प्रतिदान नहीं चाहता, बल्कि उसकी खुशियों के लिए बलिदान करता है। प्रिय की निष्ठुरता भी उसे कम नहीं कर सकती। वास्तव में प्रेम के पथ में प्रेमी और प्रिय दो नहीं, एक हुआ करते हैं। एक की खुशी दूसरे की आंखों में छलकती है और किसी के दुःख से किसी की आँख भर आती है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल कहते हैं कि 'प्रेम एक संजीवनी शक्ति है। संसार के हर दुर्लभ कार्य को करने के लिए यह प्यार संबल प्रदान करता है। आत्मविश्वास बढ़ाता है। यह असीम होता है। इसका केंद्र तो होता है लेकिन परिधि नहीं होती।' प्रेम एक तपस्या है, जिसमें मिलने की खुशी, बिछड़ने का दुःख, प्रेम का उन्माद, विरह का ताप सबकुछ सहना होता है। प्रेम की पराकाष्ठा का एहसास तो तब होता है, जब वह किसी से दूर हो जाता है।
  प्रेम में नकारात्मक सोच के लिए कोई जगह नहीं होती। जो लोग प्यार में असफल होकर अपने प्रिय को नुकसान पहुँचाने का कार्य करते हैं, वे सच्चा प्यार नहीं करते। प्रेम सकारण भी नहीं होता। प्रेम तो हो जाने वाली चीज है।      
खलील जिब्रान के अनुसार- 'प्रेम अपनी गहराई को वियोग की घड़ियाँ आ पहुँचने तक स्वयं नहीं जानता।' प्रेम विरह की पीड़ा को वही अनुभव कर सकता है, जिसने इसे भोगा है। इस पीड़ा का एहसास भी सुखद होता है। दूरी का दर्द मीठा होता है। वो कसक उठती है मन में कि बयान नहीं किया जा सकता। दूरी प्रेम को बढ़ाती है और पुनर्मिलन का वह सुख देती है, जो अद्वितीय होता है। प्यार के इस भाव को इस रूप को केवल महसूस किया जा सकता है। इसकी अभिव्यक्ति कर पाना संभव नहीं है। बिछोह का दुःख मिलने न मिलने की आशा-आशंका में जो समय व्यतीत होता है, वह जीवन का अमूल्य अंश होता है। उस तड़प का अपना एक आनंद है।

प्यार और दर्द में गहरा रिश्ता है। जिस दिल में दर्द ना हो, वहाँ प्यार का एहसास भी नहीं होता। किसी के दूर जाने पर जो खालीपन लगता है, जो टीस दिल में उठती है, वही तो प्यार का दर्द है। इसी दर्द के कारण प्रेमी हृदय कितनी ही कृतियों की रचना करता है।

प्रेम को लेकर जो साहित्य रचा गया है, उसमें देखा जा सकता है कि जहां विरह का उल्लेख होता है, वह साहित्य मन को छू लेता है। उसकी भाषा स्वतः ही मीठी हो जाती है, काव्यात्मक हो जाती है। मर्मस्पर्शी होकर सीधे दिल पर लगती है।

प्रेम में नकारात्मक सोच के लिए कोई जगह नहीं होती। जो लोग प्यार में असफल होकर अपने प्रिय को नुकसान पहुँचाने का कार्य करते हैं, वे सच्चा प्यार नहीं करते। प्रेम सकारण भी नहीं होता। प्रेम तो हो जाने वाली चीज है। किसी के खयालों में खोकर खुद को भुला देना, उसके सभी दर्द अपना लेना, स्वयं को समर्पित कर देना, उसकी जुदाई में दिल में एक मीठी चुभन महसूस करना, हर पल उसका सामीप्य चाहना, उसकी खुशियों में खुश होना, उसके आँसुओं को अपनी ँखों में ले लेना, हाँ यही तो प्यार है। इसे महसूस करो और खो जाओ उस सुनहरी अनोखी दुनिया में, जहाँ सिर्फ सुकून है।

" जीवन का पहला प्यार "

मेरी प्यारी
मोनिका…

जब से तू मेरे सेक्शन में ट्रांसफर होकर आई है, तूने मेरा चैन चुरा लिया है. अब तो पढ़ाई में भी जी नहीं लगता. सच कहूं तो मैं तुझसे लव करने लगा हूं. अब ये न कहना कि हम दोनों अभी बच्चे हैं. बच्ची होगी तू… मैं तो बहुत बड़ा हूं. सब कुछ समझता हूं. पॉपुलेशन क्यों बढ़ रही है, ये भी जानता हूं. इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है, ये भी जानता हूं.
वैसे ये ये लेटर शायद वेलेंटाइन डे के दिन तुम्हारे हाथ में होगा. मगर मैंने इसे कई रोज पहले ही क्लास में बैठकर लिख लिया है. वैसे तो ये लेटर मैं कल ही लिख लेता. मगर कल मैं घर में भूल गया कापी और पेन. क्योंकि तेरे मस्त-मस्त दो नैन.. मेरे दिल का ले गए चैन..
मैं तुमसे प्यार करता हूं और तुमसे शादी करना चाहता हूं. मेरे दिलो-दिमाग पर तू छाई है. अब तो कार्टून नेटवर्क और पोगो चैनल देखते हुए, मुझे तेरा ही चेहरा सामने नजर आता है. कम्प्यूटर गेम खेलते वक्त भी कर्सर में तेरे चेहरा ब्लिंक करता है..
तूझे विश्वास नहीं होता है तो कुरकुरे, पेप्सी, मैगी और अंकल चिप्स की कसम. तू सोचेगी कि प्यार-मुहब्बत के चक्कर में पढ़ाई बरबाद होगी. तो ऐसा मत सोच. अभी मोहब्बत करने के लिए हमारे पास तीन साल हैं. क्लास 10 तक ग्रेडिंग सिस्टम है और हम फेल नहीं होंगे. रही बात क्लास 11 और 12 की तो, वहां हम यूपी बोर्ड में एडमिशन ले लेंगे. सुना है वहां फर्स्ट डिवीजन पास करने का पूरा जुगाड़ है.
वैसे तो मुझे क्लास की बहुत सारी लड़कियां लाइक करती हैं. मगर तुम मुझे सबसे ज्यादा पसंद हो. क्योंकि तुम सुंदर हो. तुम्हारे लंच बाक्स में रोज नये-नये डिशेज रहते हैं. एक रोज मैंने तेरे लंच बाक्स से आलू के पराठे चोरी किए थे. कसम से बहुत टेस्टी थे. तेरी मम्मी अच्छी हैं जो तुझे रोज बढिय़ा-बढिय़ा खाना देती है. मेरी मम्मी लंच में रोज सैंडविच ही देती है (आई हेट सैंडविच). सुबह वो इससे ज्यादा कुछ बना भी नहीं पाती. क्योंकि वो भी स्कूल जाती है. एक्चुअली वो गवर्नमेंट जूनियर हाईस्कूल में टीचर है.
मैंने अपनी मम्मी से कहा कि मुझे अपने ही स्कूल में ही एडमिट करा दो, तो वो कहती है कि नहीं वो गंदे बच्चों का स्कूल है. अब तुम ही बताओ, गंदे बच्चों के स्कूल में मेरी मम्मी को जाने क्या जरुरत है. संडे को भी उसे क्लब और किटी पार्टिज से छुट्टी नहीं मिलती. पापा भी खुद को इंडस्ट्री का मालिक कहते हैं. इंडस्ट्री में दो हजार इम्प्लाइज हैं मगर आज तक मेरे लिए टाइम नहीं निकाल सके. वो कहते हैं कि बेटा, इतनी मेहनत तो हम तेरे लिए ही करते हैं. पर मुझे समझ नहीं आता कि क्यों करते हैं…
भले ही मेरे पैरेंट्स के पास बहुत रुपये हैं मगर तू मुझसे ज्यादा लकी है. तेरे पापा रोज तुझे स्कूल तक स्कूटर से छोडऩे आते हैं. इसके बाद तेरी मम्मी तुझे रिक्शे पर बिठा कर ले जाती है. मेरे घर दो कार है मगर मेरे मम्मी-पापा के पास टाइम नहीं है.
वैसे अगर तू मेरी गर्लफ्रेंड बनेगी तो मैं तेरे लिए कुछ भी कर सकता हूं. मैं तुम्हें वो पेन और पेन्सिल बाक्स गिफ्ट भी दूंगा जो मेरे अंकल लंदन से मेरे लिए लाए हैं. मैं हर वीक मिलने वाली अपनी 500 रुपये पॉकेटमनी के 200 रुपये भी तुम्हें दे सकता हूं. बड़ा होकर तूझसे की शादी करुंगा. फिर तेरे घर आकर रहूंगा. तेरे मम्मी के हाथों बने आलू के पराठे खाऊंगा. तेरे छोटे-भाई बहनों के साथ खेलूंगा. क्योंकि मेरा कोई भाई या बहन नहीं है. मैं घर में बिलकुल अकेला फील करता हूं. मेरे मम्मी-पापा के पास रुपये बहुत हैं मगर वो एक और बच्चा नहीं पैदा कर सकते. इसके लिए भी शायद उनके पास टाइम नहीं है.
एक और बात, तुम्हारे बगल में बैठने वाली नैन्सी भी मुझे बहुत लाइन मारती है. मगर मुझे उससे डर लगता है. क्योंकि मैंने सुना है कि उसके पापा पुलिस वाले अंकल हैं. मुझे मालूम है कि यदि उन्हें पता चला कि मेरा नैन्सी से अफेयर है तो वो मुझे एक कट्टा, दो कारतूस के खोखे के साथ अरेस्ट कर जेल भी भेज सकते हैं. या फिर फेक एनकाउंटर में मार भी सकते हैं.
इसलिए मोनिका, प्लीज-प्लीज, तूझे एग्जामिनेशन के रिजल्ट की कसम. यदि तूने मेरे प्यार को ठुकराया तो कसम से मैं पढ़ाई छोड़ दूंगा (जो अब वैसे भी नहीं हो पा रही.). मैं बड़ा होकर पॉलिटिशन बन जाऊंगा और सेंट्रल केबिनेट मिनिस्टर बन घोटाले पर घोटाला कर पूरे देश को बरबाद कर दूंगा. तेरे जैसे पढ़े-लिखे आईएएस-आईपीएस ऑफिसर्स से अपने जूते भी साफ कराऊंगा.. इसलिए मेरी जान, प्लीज मेरी बातों को सीरियसली ले.. अंत में ये चार लाइन सिर्फ तेरे लिए मैंने बनाई है…
जैसे शीला की जवानी
जैसे मुन्नी की बदमानी
वैसे मैं हूं तेरा दीवाना
तू बन जा मेरी दीवानी
तू मेरी पेप्सी, चॉकलेट और टॉफी
मैं तेरा राजा और तू मेरी रानी

 ♥I Love You so much♥.
सिर्फ तुम्हारा
राहुल
क्लास 7-सी
एबीसी पब्लिक स्कूल
(मगर दुर्भाग्य, राहुल ने ये लेटर जिस कापी में लिखा, वो कापी क्लास टीचर के हत्थे चढ़ गयी. इसी के साथ वेलेंटाइन डे के ठीक पहले ही इस मासूम लव स्टोरी का द इंड भी हो गया..)

"स्वागत"

नमस्कार पाठकों , मै विवेक शुक्ला आज अपनी पहली ब्लॉग start कर रहा हूं . 

इस ब्लॉग में आप सभी का स्वागत करता हूँ.

आशा है यह आपको पसंद आएगी और मुझे तब खुशी होगी जब यह आपके काम आएगी ...